भयंकर मंदी है,बैंकों में नकदी कमी,    नौकरियों का अकाल, क्राइम रेट हाई, सरकारी अफसर बेलगाम, सरकारी जुल्म से मुकदमों का अंबार, अदालतें केस सुनने को तैयार नहीं, सरकारी अस्पतालों में न स्ट्रेचर, न बेड खाली, जैसा पैसा वैसी मिलती शिक्षा , बिना पैसा-सिफारिश सब शून्य, सरकारी फ्री की योजनाओं से काहिल बनते इंसान, जितना सच्चा इंसान उतना सताया जाता इंसान, पुलिसया जुल्म बेइंतहा, जनता के टैक्स पर मौज मारते राजनेता, आम इंसान न जी सकता है, न मर सकता है, उस पर देश भक्ति का भोंपू बजाता लोकतंत्र का चौथा खम्बा, क्षमा करना बापू, आजादी दिलाकर आपने ऐतिहासिक गलती की !

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